कोटा के ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप गांव-गांव घूम कर रहे खुले आम इलाज और जिंदगी के साथ खिलवाड़

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर। जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसी का फायदा उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क एक बार फिर सक्रिय हो गया है। बिना किसी मेडिकल डिग्री और वैधानिक अनुमति के ये कथित डॉक्टर गांव-गांव में अवैध क्लीनिक और घर – घर मे घूम कर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बिना जांच के हैवी इंजेक्शन लगाना और ग्लूकोज की बोतलें चढ़ाना आम हो चुका है।
इन इलाकों में फैला है जाल ::-

जिले के कोटा, रतनपुर, बेलगहना, खोंगसरा, टेंगनमाड़ा, करवा, लुफा, लहंगाभाठा, कुरदर, केंदा, सरारटिकरा, मझगवां और छतौना जैसे दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों में इनका कारोबार बेखौफ चल रहा है। और पूर्व मे भी करवा, और बेलगहना मे झोलाछाप डॉक्टरो की ईलाज से दो सगे भाई की करवा मे और एक लड़की की बेलगहना मे मौत हुआ फिर भी बेखौफ़ हो कर धड़ल्ले से ईलाज चाल रहा, अस्पतालों की दूरी और मजबूरी का फायदा उठाकर ये मरीजों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। पूर्व में गलत इलाज के कारण कई मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
कब जागेगा विभाग क्या हो पायेगा कार्रवाई :-

कोटा क्षेत्र के मे झोलाछाप डॉक्टरों की जाल इस मामले पर कोटा ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (BMO) कब लेते है झोलाछाप डॉक्टरों को सिकंजे मे या यूँ ही मिलीभगत से धड़ल्ले से चलता रहेगा मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतें कई बार होती हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में इन फर्जी डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं। अब देखना यह है कि विभाग कब जागता है और धरातल पर क्या एक्शन लेता है। बारिश में वायरल बुखार, डायरिया, मलेरिया और टाइफाइड के मरीज बढ़ते हैं। तत्काल राहत के चक्कर में झोलाछाप डॉक्टरों के पास न जाएं, यह जानलेवा हो सकता है। किसी भी बीमारी में केवल पंजीकृत और योग्य डॉक्टर से ही इलाज कराएं।
















